टूटी-फूटी सड़कें..., कूची गई मोटरसाइकिल और साइकिलें..., बंद व अधखुली झोपड़ियां..., बुझे चूल्हे और बिखरे बर्तन.., भोजन की आस में मायूस बैठीं मुसहरों की भेंड़-बकरियां....हर ओर दहशत और खौफ का मंजर... यह दास्तां है पिंडरा के थाना गांव की मुसहर बस्ती का। यह वही गांव है जहां शनिवार की शाम उपद्रव हुआ था। चौबीस घंटे बीत जाने के बावजूद इस बस्ती में उपद्रव की काली दास्तां बहुत कुछ बयां कर रही है। गांव एक तरह से पुलिस छावनी में बदल गया है। सुरक्षाबलों की एक टुकड़ी टियर गन की खोजबीन में जुटी है। गांव की पोखरी में कुछ युवकों को उतारा गया है। पुलिस दल उसे ढुंढवाने में जुटी रही।
शनिवार की शाम जातीय हिंसा और आगजनी से कराहते थाना गांव की मुसहर बस्ती में मरघटी सन्नाटे का मंजर देखने के बाद कोई भी कह सकता है, जैसे यह सीरिया का कोई इलाका हो। बच्चों का मामूली विवाद यहां हिंसा की शक्ल में बदल गया था। लोग इस कदर उग्र हो गए थे कि पुलिस से भिड़ने और मरने-मारने से भी नहीं चूके। अलबत्ता सुरक्षा बलों पर ईंटें बरसायी गईं और जानलेवा हमले भी किए गए। इस हादसे में पुलिस इंस्पेक्टर सनवर अली समेत आधा दर्जन पुलिसकर्मी और कुछ ग्रामीण बुरी तरह घायल हुए हैं।