यूटिलिटी डेस्क. अस्पताल में इलाज कराना समय के साथ महंगा होता जा रहा है। बिना हेल्थ इंश्योरेंस के अस्पताल में भर्ती होना न सिर्फ व्यक्ति की जेब पर भारी पड़ सकता है, बल्कि वित्तीय स्थिति को भी गड़बड़ा सकता है। ज्यादातर लोगों के पास कंपनी द्वारा कराया गया ग्रुप मेडिकल कवर (जीएमसी) ही होता है। उनके पास एक अलग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी नहीं होती है। ऐसे में यदि आप नौकरी छोड़ते हैं तो जीएमसी का लाभ नहीं मिलता है। इसलिए एक अलग हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेना आवश्यक है। आइए हेल्थ इंश्योरेंस के बारे में विस्तार से जानें..
पॉलिसी के प्रकार
इंडिविजुअल हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी
एकमुश्त सालाना प्रीमियम चुकाने पर बीमा कंपनी व्यक्ति को यह मेडिकल कवर देती है। इसका पूरे परिवार के लिए भी विस्तार किया जा सकता है। ऐसे में हर सदस्य के लिए निश्चित राशि देनी होती है।
फैमिली फ्लोटर हेल्थ प्लान
एकमुश्त सालाना प्रीमियम चुकाने पर बीमा कंपनी पूरे परिवार के लिए मेडिकल कवर देती है। इसके तहत पूरी बीमा राशि का लाभ किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता है। इसका लाभ परिवार के सभी सदस्यों को मिलता है। इसमें आमतौर पर व्यक्ति, जीवनसाथी और बच्चे शामिल होते हैं।
पर्सनल एक्सीडेंट कवर
दुर्घटना आंशिक या पूरी तरह विकलांग बना सकती है। यह बीमा पॉलिसी काम करने की क्षमता न रहने पर आय को होने वाले नुकसान के अलावा, मृत्यु पर भी बीमा कवर उपलब्ध कराती है।
क्रिटिकल इलनेस कवर
इसके तहत व्यक्ति को पॉलिसी में लिखी विशेष बीमारियों के खिलाफ बीमा कवर मिलता है। पॉलिसी में लिखी किसी बीमारी के डाइग्नोस होने पर बीमा कंपनी व्यक्ति को एकमुश्त राशि भुगतान करती है।
सुपर टॉप-अप कवर
बीमित राशि का पूरा या बड़ा हिस्सा इलाज में खर्च हो जाने पर सुपर टॉप-अप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी बाकी खर्च के लिए सुरक्षा मुहैया कराती है। इसमें बीमाधारक तय कर सकता है कि किस सीमा तक खर्च खुद वहन करेगा।
प्री-एग्जिस्टिंग इलनेस कवर
हेल्थ इंश्योरेंस लेते वक्त अगर कोई बीमारी है, तो उसे प्री-एग्जिस्टिंग इलनेस कहते हैं। कुछ बीमा कंपनियां ऐसी बीमारियों पर भी कवर मुहैया कराती हैं। व्यक्ति को बीमा कराते वक्त इसका खुलासा करना होता है।
क्लेम के प्रकार
कैशलेस
बीमा कंपनी के नेटवर्क से जुड़े अस्पताल में व्यक्ति को पैसा अदा किए बिना इलाज की सुविधा मिलती है। बीमा कंपनी पॉलिसी की शर्तों के मुताबिक सीधे अस्पताल/नर्सिंग होम के साथ क्लेम सैटल करती है।
रीइम्बर्समेंट
इस तरह के क्लेम में व्यक्ति अस्पताल से छ़ुट्टी होने पर इलाज का खर्च खुद भुगतान करता है। इसके बाद जरूरी दस्तावेज पेश कर बीमा कंपनी से राशि क्लेम करता है।